Friday, January 18, 2019

कोना

घर का वो कोना ही ठीक है,
इस दुनिया में न दिल मिलता है ना दिमाग

मेज़ पे चढ़ी गर्द पे कोई सवाल नहीं पूछता
इस दुनिया के सवाल हैं की जिनपे गर्द ही नहीं पड़ती

कप तले कितने ही छळले बने होंगे
इस दुनिया के चक्कर हैं की ख़त्म ही नहीं होते

पेन होल्डर में सही पेन ना मिलना भी उलझन नहीं देता
इस दुनिया में पेन तो मिलते हैं लेकिन ख़याल नहीं मिलता

वो दराज़ किसी भानुमति के पिटारे से कम नहीं
इस दुनिया में पिटारे तो बहुत हैं लेकिन कोई राज़ नहीं

ना जाने क्या क्या समाया रहता है कागज़ों के गट्ठर में
इस दुनिया के कागज़ों को हाथ लगाने का मन नहीं करता

घर का वो कोना ही ठीक है,
इस दुनिया में न दिल मिलता है ना दिमाग


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