Tuesday, March 15, 2016

नुमाइश

शब्दों की नुमाइश है सब
मुझे लगा तेरे दिल में थोड़ी गुंजाईश है अब 

सबकी तरह तूने भी देखा सराहा 
सबकी तरह तुझको भी इन शब्दों ने उकसाया 

मुझे लगा आज तो जवाब मिलेगा 
लेकिन सबकी तरह तूने भी बात घुमा, ध्यान कहीं और बटाया

तेरे लिए तो कुछ हुआ ही नहीं 
तेरे लिए तुझसे अनजान कोई नहीं 

ख़ैर ये तो हुआ है और होता रहेगा 
मुझसे पूछ, मेरे शब्दों से बदनाम कोई नहीं

इसको कोई शिक़ायत मत समझना
ये तो एक उम्मीद है जिसका ख़त्म होने का नाम नहीं

मेरे शब्द मेरे हैं और तेरे रास्ते तेरे
ये ज़रूरी तो नहीं की मैं नुमाइश लगाऊँ और तू हर बार आये साथ देने