Sunday, August 3, 2014

तस्वीरें

तू क्या जाने इन नम आँखों कि बात
अब तो बस होती है छुपछुपके बरसात

कई तस्वीरें याद आती हैं
यादों पे तैरते इन आँखों के किनारे लग जाती हैं

मैं उठता हूँ, एक एक तस्वीर बीनता हूँ
तू कब आयेगी ये सोचता हूँ

अब तो बहुत दिन बीते, अब तो आजा
पुरानी देखलीं बहुत, एक नयी तस्वीर दिखाजा

देख तो मेरा हाल कैसा है
कोरे कागज़ पे रखी खाली कलम सा है

ना कल का पता ना आज का
साथ है तो बस तेरी याद का

आंसुओं में अगर रंग होते, तो एक तस्वीर बनाता
अधूरे सपनों कि झलक तुझको भी दिखाता

वो दुनिया और है जहाँ तू है
मेरी हर पंक्ती में बस अब तू है

आजा ये घर फिर से बनायेंगे
आजा 'हम सबके' रंगों कि एक नयी तस्वीर बनायेंगे


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