Saturday, March 15, 2014

इच्छा

सपनों में कब आओगी माँ 
कब फिर से बुलाओगी माँ 

बहुत दिन बीते आवाज़ सुने
कब फिर से सर सहलाओगी माँ 

हर बात को तुम्हारी याद करता हूँ 
हर चीज़ में तुमको ढूंढ़ता हूँ 

समय तो चलेगा, बदलेगा
कब फिर से मिलने आओगी माँ

जैसे कल कि ही तो बात थी 
तुम मेरे साथ थीं 

कितना समझातीं थीं फ़ोन पे 
अब कब समझाओगी माँ 

अरे कुछ तो बोलो 
चलो अब ये नाराज़गी छोड़ो 

बहुत मन है मिलने का 
और कितना सताओगी माँ 

अकेली तो तुम भी हो, मानता हूँ
और यहीं कहीं हो, जानता हूँ

बस एक बार आवाज़ देदो 
और कितना तरसाओगी माँ


2 comments:

Vinaya Naidu said...

so beautiful!!! Mothers are the dearest creatures on this planet.

Jhumz said...

Wow beautiful....Could not hold back the tears.... Very well expressed.

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