Thursday, March 13, 2014

मेरी कहानी

तुमने सिर्फ़ परछाइयाँ देखीं, ना देखा मेरा मन 
ये सब तो कथाएं थीं, जो मैंने देखीं होकर सत्तब्ध 

समय कि सिहाई कभी ख़त्म नहीं हुई 
तो विचारों कि दवात पर कभी नज़र नहीं गई 

पन्ने बहुत थे उस डायरी में 
वो कलम थी जो बस बे-सुध चलती रही 

ये मेरा मेरे से ही संवाद था 
हर आभास अपने आप में ही अपवाद था

जो दिखा वो लिखा, एक एक शब्द का
सूत समेत हिसाब दिया

अब सोचता हूँ कि डायरी बदल लूं
लेकिन अच्छे समय का आश्वासन किस्से लूं

क्योंकि जो कुछ मेरा है वो सब मैंने देखा है
तुमने तो बस पड़ा और सहजता से भुला दिया है




2 comments:

Vinaya Naidu said...

The title reminded me to listen to my favourite singers song 'Meri Kahani' - Atif Aslam.
Nice poem..you have a beautiful way with Hindi...nice to see u blogging Paras:)

1CupChai said...

:) thanks vinaya

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