Sunday, March 9, 2014

लम्हे

अतीत का लेखा जोखा हैं वो लम्हे 
यादों का झोंका हैं वो लम्हे 

नम आँखों की वजह हैं वो लम्हे 
गहरी साँसों कि तरह हैं वो लम्हे 

कभी मुस्काते तो कभी कचोटते वो लम्हे 
काले सफ़ेद में रंग उभारते वो लम्हे 

उन लोगों के एहसानों के हैं वो लम्हे 
हाथ से सरकती रेत के हैं वो लम्हे 

सपनों का मेल हैं वो लम्हे 
समय का निर्दयी खेल हैं वो लम्हे

जाने किस घर के हैं वो लम्हे 
जाने किस दुनिया के हैं वो लम्हे 



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