Tuesday, August 20, 2013

मेहमान

इधर रात ने अपनी पहली करवट ली
तो उधर एक अप्रत्याशित मेहमान ने दस्तक दी

मैं तो यूं ही खाली बैठा था
थोड़ा ध्यान दिया तो एक चिड़िया की चेह-चाहट सुनाई दी

सोचा शायद इसी को 'कलयुग' कहते हैं
रात में चिड़िया तो दिन में सपने दिखाई देते हैं

पहले तो हंसी आई इस सब पे
फिर लगा कहीं ये मेरी कहानी तो नहीं कहते हैं

जो भी हो मुझे क्या पता, वो चिड़िया
भटकी थी या आज़ाद थी

शायद वो जानती थी मुझको, इसीलिए तो
उसकी, केवल एक ही बार आवाज़ सुनाई दी

वैसे बात तो विस्मित करती है
सोचता हूँ वो क्या सोचती है

खैर, रहने दो इस चिड़िया जैसी अनेक कहानियां हैं
जो मेरी याद की बालकनी में वक़्त-बे वक़्त दस्तक देती हैं

Image Courtesy : The Hindu

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