Tuesday, February 12, 2013

कैसे


कैसे चीज़ों को नयी परिभाषा दूं
कैसे इस मन को नयी अभिलाषा दूं

कैसे कल की ना सोचूँ
कैसे नियति को होने से रोकूं

कैसे तेरे वो एहसान भुला दूं
कैसे मेरे वो नाम भुला दूं

कैसे तुझको अलग कर दूं
कैसे अपना ही जीवन व्यर्थ कर दूं

कैसे इन सबके जवाब ढूँढू कैसे.......


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