Saturday, July 7, 2012

ये जीवन

अरे जीवन तू क्यों इतना विस्मित करता है
हर सांस के साथ क्यों नए प्रश्न खडे करता है

मेरा हर उत्तर तेरे नए प्रश्न को ही इशारा करता है
अरे थोड़ा तो समय दे तुझको जीने का मेरा भी मन करता है

तिनका तिनका संजोया है बस तेरे लिए, 
अरे पूरा नहीं तो आधा जीवन ही दे जीने के लिए

तेरी हर बात सुनी और देखी तेरी मनमानी
अब थोडा तू भी पड़ ले ये अधूरी कहानी 

हर कोशिश की जोड़ के रखा हर मोती
मन को चुप करा दी अनेकों आहुति

संघर्ष से कहाँ डर लगता है, हैरान हूं 
क्या कभी कोई तुझसे भी प्रश्न करता है

ये कोई शिकायत नहीं एक विनती है
कुछ सांझा सपने हैं जिनके आगे मेरी इच्छाएं मिटटी हैं

आकाश कहाँ फुर्सत के दो पल मांगे हैं
थोडा साथ दे इस माला के बिलकुल कच्चे धागे हैं

Image Courtesy : Making Sense of Water
(
http://wiziris.tk/comb-the-river.html )

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