Saturday, July 7, 2012

मन करता है


कभी कभी ये दुनिया जलाने का मन करता है
कभी कभी यहाँ से भाग जाने का मन करता है

कभी कभी इस संघर्ष का अंत करने का मन करता है
कभी कभी एक अपना सवेरा देखने का मन करता है

कभी कभी अपनों पे मरने का मन करता है
कभी कभी उपरवाले से लड़ने का मन करता है

कभी कभी भीड़ में चीखने का मन करता है
कभी कभी अकेले खुद से बात करने का मन करता है

बहुत कुछ है अधूरा जिसको पूरा करने का मन करता है
इस जीवन को फिर से जीने का मन करता है

कभी कभी उम्मीद की इस लौ को जलाये रखने का मन करता है
खिड़की से आती इन आँधियों को जकडने का मन करता है

कभी कभी एक ही बात को कई बार कहने का मन करता है
कभी कभी वही पुरानी कविता को नए नाम से लिखने का मन करता है

कभी कभी खुल के रोने का मन करता है
कभी कभी कितना सहना है यह सोचने का मन करता है


Image Courtesy : Vivian Wenhuey Chen

ये जीवन

अरे जीवन तू क्यों इतना विस्मित करता है
हर सांस के साथ क्यों नए प्रश्न खडे करता है

मेरा हर उत्तर तेरे नए प्रश्न को ही इशारा करता है
अरे थोड़ा तो समय दे तुझको जीने का मेरा भी मन करता है

तिनका तिनका संजोया है बस तेरे लिए, 
अरे पूरा नहीं तो आधा जीवन ही दे जीने के लिए

तेरी हर बात सुनी और देखी तेरी मनमानी
अब थोडा तू भी पड़ ले ये अधूरी कहानी 

हर कोशिश की जोड़ के रखा हर मोती
मन को चुप करा दी अनेकों आहुति

संघर्ष से कहाँ डर लगता है, हैरान हूं 
क्या कभी कोई तुझसे भी प्रश्न करता है

ये कोई शिकायत नहीं एक विनती है
कुछ सांझा सपने हैं जिनके आगे मेरी इच्छाएं मिटटी हैं

आकाश कहाँ फुर्सत के दो पल मांगे हैं
थोडा साथ दे इस माला के बिलकुल कच्चे धागे हैं

Image Courtesy : Making Sense of Water
(
http://wiziris.tk/comb-the-river.html )