Wednesday, May 9, 2012

भूल गया

ये कोई घटना नहीं ये तो दिनचर्या है
एक नहीं अनेक चीज़ों को मैंने भूला है

आज ही लेलो, माँ से बात करना भूल गया
कुछ डाक थी जिनको समय से भेजना भूल गया

एक दोस्त को नए मेहमान की शुभकामना देना भूल गया
तो वहीँ उस रोटी को समय से पलटना भूल गया

अपनी गन्दी मेज़ साफ़ करना भूल गया
एक धुंधले चेहरे को याद करना भूल गया

कुछ रास्ते थे जिनपे चलना भूल गया
एक दोस्त था जिसको सांत्वना देना भूल गया

मंदिर में भगवान् से मिलना भूल गया
तो कई बार खुद से किये वादों को ही भूल गया

कभी वसूल करना तो कभी उधार चुकाना भूल गया
कुछ गलत फेह्मियां थीं जिनको दूर करना भूल गया

बचपन में सीखे कुछ पाठ भूल गया
कभी हसना तो कभी जीना भूल गया

दो तीन किताबें थीं जिनको पूरा पड़ना भूल गया
ये लो, जो भूला उसको याद रखना भी भूल गया

ये मजबूरी नहीं आदत है, ये चूक नहीं
आपा-धापी की इबादत है

ये सिर्फ पैसों की इमारत बनाती है
उन् रिश्तों के अर्थ मिटाती है

पूरा नहीं तो थोड़ा खुद को समझा लो
मूल नहीं तो सूत को ही चूका दो

Image Courtesy : Nayeem
(
http://www.flickr.com/photos/nayeem_kalam/6567936137/ )

2 comments:

VJ said...

verrrrry nice, P.

1CupChai said...

thanks vidhu :)

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