Tuesday, April 10, 2012


I know this will sound more like one of my previous post dated 7th April. But to be honest its not, both carry entirely different theme. I tried to maintain the difference but I guess limited vocabulary didn't allowed me to do the justice. Anyways I've expressed what I was thinking and its history now. Here I go...

जब वो शहर छूटेगा
सालों पुराना एक नाता छूटेगा
एक अतीत एक रिश्ता
एक जहां छूटेगा

जब वो शहर छूटेगा
किताब का वो आखरी पन्ना छूटेगा
साथ ही ये मन और
वक़्त से गिरा वो लम्हा टूटेगा

जब वो शहर छूटेगा
मेरा वो बचपन छूटेगा
साथ ही "आगे बढने" का वो दैत्य
सरेआम मुझको लूटेगा

जब वो शहर छूटेगा
सुख दुःख का वो मेला छूटेगा
एक मैदान एक गलियारा
और एक घरौंदा छूटेगा

जब वो शहर छूटेगा
दादी से वो मिलना छूटेगा
जो खोया जो पाया
उसका अर्थ भी छूटेगा

जब वो शहर छूटेगा
वापसी का वो सपना टूटेगा
एक पता जिसे अपना कह सकू
वो भी छूटेगा

Old Bridge (Courtesy : http://roorkeecityonline.com)


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