Friday, April 27, 2012

1CupChai

तेरी चुस्की में ही तो मेरा जीवन है
तेरी सादगी जैसा ही तो मेरा मन है
तुझपे तो मैं सब कुछ वार दूं 
एक बार नहीं हर बार तुझको मैं प्यार दूं 

तेरी चुस्की में ही तो मेरा जीवन है
सुबह की तू पहली सुन्हेरी किरण है
जब भी आती एक मुस्कान दे जाती
जीवन को जीने की एक और वजह समझती

तेरी चुस्की में ही तो मेरा जीवन है
सुबह शाम बस तेरा ही स्मरण है
हर बार तू इतनी ताज़गी दे जाती, कभी वो
मीठी रात तो कभी वो गीली शाम याद दिला जाती

तेरी चुस्की में ही तो मेरा जीवन है
तुझको पाना ही मेरा पहला कर्म है
तेरा हर प्याला मुझको अलग लगता है
मानो हर बार मुझको नए आशा देता है

तेरी चुस्की में ही तो मेरा जीवन है
मेरी तरह बोहोतों की तू हम-दम है
तेरे प्यालों ने कहानियां भी बोहोत सुनी हैं
कुछ मेरी कुछ उसकी रवानियाँ भी सुनी हैं

तेरी चुस्की में ही तो मेरा जीवन है
आम को ख़ास बनाना ये तो तेरा फ़न है
तेरा हर प्याला एक नयी सीख देता है
खुद ख़तम होके दूसरों को ख़ुशी देता है

तेरी चुस्की में ही तो मेरा जीवन है
इस ठहरे सफ़र की एक ही तो तू हमसफ़र है
मंजिल मिले न मिले तेरे साथ थोडा जी लेंगे
एक चुस्की तेरी दम भर पी लेंगे

1CupChai :-)




0 comments:

Post a Comment