Saturday, March 24, 2012

चल चलें

this was inspired by following lines by Rumi.


"Pata hai
Yahan se bohot door
galat aur sahi ke paar
ek maidaan hai
main wahan miloonga tujhey"

चल चलें इस दरिया के पार
चल चलें सरहद के उस पार
चल चलें एक ऐसी दुनिया में
जहाँ सारी धरती तेरी और
सारा आकाश मेरा हो


चल चलें इस दरिया के पार
चल चलें होके अपनी सोच पे सवार
चल चलें एक ऐसी दुनिया में
जहाँ सिर्फ मन की चले और
जहाँ ज़बां वही बोले जो मन कहे


चल चलें इस दरिया के पार
चल चलें करने अपनी आज़ादी से प्यार 
चल चलें एक ऐसी दुनिया में
जहाँ ये बंदिशें ना हों 
अगर कोई हो तो सिर्फ तुम और मैं हूँ


चल चलें इस दरिया के पार
चल चलें देखने अपने सपनों को एक बार
चल चलें एक ऐसी दुनिया में
जहाँ रात का अर्थ दिन और
जहाँ नफरत का मतलब भी हो प्यार


चल चलें इस दरिया के पार
चल चलें मिलने उन् उम्मीदों से एक बार
चल चलें एक ऐसी दुनिया में 
जहाँ सूरज रौशनी दे तपिश नहीं 
जहाँ चाँद शीतल रहे विचलित नहीं


चल चलें इस दरिया के पार 
चल चलें देखने उन् परिंदों को एक बार
चल चलें एक ऐसी दुनिया में
जहाँ सांस और घुटन का नाता ना हो
जहाँ कभी कोई काला सियाह ख़याल आता ना हो 


चल चलें इस दरिया के पार
चल चलें सरहद के उस पार 



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